:
Breaking News

घूसखोरी पर निर्णायक प्रहार: बिहार में तीन नए निगरानी थाने, भ्रष्टाचार के मामलों के त्वरित निपटारे की तैयारी

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना।बिहार सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने रुख को और सख्त करते हुए साफ कर दिया है कि घूसखोरी के लिए अब राज्य में कोई जगह नहीं होगी। जीरो टॉलेरेंस नीति को जमीन पर उतारने की दिशा में सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत सीमांचल के तीन जिलों—पूर्णिया, अररिया और कटिहार—में जल्द ही निगरानी थाना खोले जाएंगे। इसके साथ ही भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे के लिए कोर्ट की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया पर भी काम शुरू कर दिया गया है।
इसकी जानकारी निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने दी। उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अब केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे व्यवस्था में सुधार और भरोसे की बहाली से जोड़ा जा रहा है।
अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रहा है, जिसके चलते जनता का भरोसा इस विभाग पर तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि निगरानी टीम के प्रदर्शन का असर यह है कि विभाग अपने ही पुराने रिकॉर्ड तोड़ रहा है और हर शिकायत पर गंभीरता से जांच की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निगरानी थानों की स्थापना का उद्देश्य सिर्फ केस दर्ज करना नहीं, बल्कि स्पीडी ट्रायल के जरिए दोषियों को जल्द सजा दिलाना है। इसी वजह से सरकार केसों की बढ़ती संख्या को देखते हुए न्यायिक ढांचे को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आने वाले समय में अदालतों की संख्या बढ़ाकर मामलों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था की जाएगी।
एक कार्यशाला के दौरान अपर मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि हाल ही में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी। उम्मीद है कि अब भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का निपटारा तीन साल के भीतर पूरा हो सकेगा। इससे न सिर्फ पीड़ितों को समय पर न्याय मिलेगा, बल्कि घूसखोरों में कानून का डर भी बढ़ेगा।
अरविंद कुमार चौधरी ने यह भी माना कि बिहार में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इसके पीछे एक सकारात्मक वजह है। उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता बढ़ी है, लोग अब डरने के बजाय शिकायत दर्ज करा रहे हैं। जैसे ही सूचना मिलती है, निगरानी विभाग तत्काल कार्रवाई करता है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि निगरानी थानों में दर्ज होने वाले सभी मामलों को फास्ट ट्रैक पर ले जाया जाएगा, ताकि घूसखोरी करने वालों को जल्द सजा मिल सके। सरकार की मंशा साफ है—भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना और प्रशासन में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करना।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि यह संदेश है कि राज्य में अब ईमानदारी विकल्प नहीं, अनिवार्यता होगी और घूसखोरी करने वालों के लिए कानून का शिकंजा पहले से ज्यादा कसने वाला है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *